नमस्कार मित्रों! आज हम आपको एक ऐसी रहस्यमयी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके इतिहास के बारे में शायद ही आपने कभी सुना होगा। यह अद्भुत स्थान भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में स्थित Unakoti Tripura है।
भारत के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच एक ऐसा स्थान छिपा है, जो इतिहास, आस्था और रहस्य का एक अनूठा संगम है। इसे Unakoti Tripura (उनाकोटी) के नाम से जाना जाता है। पत्थरों पर उकेरी गई विशालकाय देवी-देवताओं की नक्काशी और रहस्यमयी माहौल के कारण इसे ‘पूर्वोत्तर का खजुराहो’ भी कहा जाता है।
आइए, Unakoti Tripura के प्राचीन रहस्य, इसकी पौराणिक कथाओं, पुरातात्विक महत्व और यात्रा से जुड़ी सभी जानकारियों को विस्तार से जानते हैं।
उनाकोटी क्या है और कहाँ स्थित है?
यह त्रिपुरा का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है, जो मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित एक खुला कला संग्रहालय (Open-air relief gallery) है। यहाँ विशाल पत्थरों और पहाड़ियों की चट्टानों पर नक्काशी करके सैकड़ों देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और आकृतियाँ उकेरी गई हैं।
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स्थान: यह स्थल त्रिपुरा के उनाकोटी जिले में कैलाशहर उप-खंड (Kailashahar Subdivision) के पास स्थित है।
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दूरी: Unakoti Tripura की दूरी राजधानी अगरतला से लगभग 178 किलोमीटर है।
नाम का मतलब: ‘उनाकोटी’ का अर्थ क्या है?
बंगाली और स्थानीय भाषा में ‘उनाकोटी’ (Unakoti) शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है—”एक करोड़ से एक कम” (One less than a crore i.e., 99,99,999)।
मान्यता है कि इस स्थान पर कुल 99,99,999 मूर्तियाँ और चट्टानों पर नक्काशी (Rock-cut carvings) मौजूद हैं। इसी संख्या के कारण इस स्थान का नाम उनाकोटी पड़ा।
Unakoti Tripura का संक्षिप्त इतिहास
इस ऐतिहासिक स्थल का इतिहास मुख्यतः 8वीं और 9वीं शताब्दी (8th – 9th Century AD) के आसपास का माना जाता है। इतिहासकार और पुरातत्वविद मानते हैं कि पाल राजवंश के काल में यह क्षेत्र शैव पंथ (Shaivism) का एक प्रमुख केंद्र था। घने जंगलों के बीच पत्थरों को तराशकर बनाई गई ये आकृतियाँ प्राचीन भारतीय मूर्तिकला का एक अद्भुत उदाहरण हैं।
उनाकोटी की सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथा
इसके अस्तित्व में आने के पीछे एक अत्यंत लोकप्रिय पौराणिक कथा प्रचलित है:
भगवान शिव और 1 करोड़ देवी-देवताओं की कथा:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान शिव 1 करोड़ देवी-देवताओं के साथ काशी (वाराणसी) जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने इस निर्जन पहाड़ी स्थान पर रात में विश्राम करने का निर्णय लिया। शिवजी ने सभी देवी-देवताओं को चेतावनी दी कि वे सूर्योदय से पहले जागकर यात्रा पुनः प्रारंभ कर दें।
परंतु, अगली सुबह केवल भगवान शिव ही समय पर जाग सके; बाकी सभी देवी-देवता सोए ही रह गए। क्रोधित होकर भगवान शिव ने उन सभी को वहीं पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया और अकेले ही काशी के लिए प्रस्थान कर गए। माना जाता है कि तभी से ये 1 करोड़ में से एक कम (99,99,999) मूर्तियाँ यहाँ विराजमान हैं।
विशाल शिव प्रतिमा: ‘उनाकोटिश्वर काल भैरव’ का रहस्य
Unakoti Tripura की सबसे मुख्य और आकर्षक नक्काशी “उनाकोटिश्वर काल भैरव” (Unakotiswara Kal Bhairava) की है:
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ऊँचाई: यह शिव प्रतिमा लगभग 30 फीट ऊँची है।
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विशिष्टता: प्रतिमा में भगवान शिव का विशाल सिर (Head-dress) उकेरा गया है, जिसकी ऊँचाई लगभग 10 फीट है।
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संरचना: इस विशाल चेहरे के दोनों ओर दो महिला आकृतियाँ बनी हैं, जिनमें से एक को माँ गंगा और दूसरी को देवी दुर्गा माना जाता है।
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अन्य आकृतियाँ: इसके समीप ही चट्टान पर तीन विशाल गणेश मूर्तियाँ और भगवान नंदी की आकृतियाँ भी तराशी गई हैं।
पत्थर की विशाल नक्काशियाँ और कलात्मकता
यहाँ नक्काशियों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:
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रॉक-कट नक्काशी (Rock-cut Reliefs): सीधे पहाड़ की खड़ी चट्टानों को छैनी-हथौड़े से तराशकर बनाई गई मूर्तियाँ।
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स्वतंत्र मूर्तियाँ (Stone Statues): अलग से पत्थरों को काटकर बनाई गई मूर्तियाँ, जो स्थल के आसपास बिखरी हुई हैं।
यहाँ भगवान शिव के अलावा गणेश, हनुमान, राम, रावण, दुर्गा और विष्णु की आकृतियाँ भी देखने को मिलती हैं।
क्या सच में यहाँ करोड़ों मूर्तियाँ हैं?
वैज्ञानिक और पुरातात्विक दृष्टि से देखा जाए, तो यहाँ सचमुच 99,99,999 मूर्तियाँ नहीं हैं। यह संख्या पौराणिक मान्यताओं और जनश्रुतियों पर आधारित है।
समय के साथ घने जंगल, प्राकृतिक क्षरण (Erosion), भूकंप और उचित देखभाल के अभाव में कई मूर्तियाँ नष्ट हो चुकी हैं। वर्तमान में यहाँ सैकड़ों की संख्या में चट्टानी नक्काशियाँ और मूर्तियाँ स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं।
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Unakoti Tripura का पुरातात्विक महत्व (Archaeological Significance)
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने Unakoti Tripura को एक संरक्षित स्मारक (Protected Monument) घोषित किया है। यह स्थान प्राचीन भारत के रॉक-कट स्थापत्य कला (Rock-cut Architecture) का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। ASI यहाँ की मूर्तियों के संरक्षण और प्राकृतिक क्षरण से बचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)
यहाँ घूमने का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च के बीच का होता है:
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मौसम: इस दौरान मौसम सुहाना और सुखद रहता है, जिससे पहाड़ियों पर घूमना आसान होता है।
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अशोक अष्टमी मेला: अप्रैल महीने में यहाँ प्रसिद्ध ‘अशोक अष्टमी मेला’ आयोजित किया जाता है, जहाँ हज़ारों श्रद्धालु पवित्र स्नान और पूजा-अर्चना के लिए एकत्र होते हैं।
Unakoti Tripura कैसे पहुँचें? (How to Reach)
Unakoti Tripura पहुँचने के लिए सबसे प्रमुख नज़दीकी शहर कैलाशहर (Kailashahar) और धर्मनगर (Dharmanagar) हैं।
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हवाई मार्ग (By Air): निकटतम हवाई अड्डा अगरतला (Maharaja Bir Bikram Airport) है। अगरतला से उनाकोटी की दूरी लगभग 178 किमी है, जिसे टैक्सी या बस द्वारा 5-6 घंटे में तय किया जा सकता है।
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रेल मार्ग (By Train): निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन धर्मनगर (Dharmanagar) है, जो उनाकोटी से लगभग 20-25 किमी दूर है। धर्मनगर के लिए गुवाहाटी और अगरतला से सीधी ट्रेनें उपलब्ध हैं।
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सड़क मार्ग (By Road): अगरतला, धर्मनगर और कैलाशहर से यहाँ के लिए नियमित बसें और प्राइवेट टैक्सियाँ आसानी से मिल जाती हैं।
यात्रा के लिए महत्वपूर्ण टिप्स (Travel Tips)
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आरामदायक जूते पहनें: स्थल तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ उतरनी और चढ़नी पड़ती हैं, इसलिए ग्रिप वाले स्पोर्ट्स शूज़ पहनें।
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पानी और स्नैक्स साथ रखें: पहाड़ी और जंगली इलाका होने के कारण स्थल के ठीक पास सीमित दुकानें हैं।
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मानसून से बचें: बारिश के मौसम (जून से सितंबर) में सीढ़ियाँ फिसलने वाली हो जाती हैं और घने जंगलों में यात्रा थोड़ी कठिन हो सकती है।
उनाकोटी के कम ज्ञात रोचक तथ्य (Lesser-Known Facts)
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कल्लु कुम्हार की कहानी: एक स्थानीय मान्यता के अनुसार, इन मूर्तियों का निर्माण ‘कल्लु कुम्हार’ नाम के एक मूर्तिकार ने किया था। वह शिव-पार्वती के साथ कैलाश जाना चाहता था। शर्त के मुताबिक उसे एक रात में 1 करोड़ मूर्तियाँ बनानी थीं, लेकिन सुबह होने तक वह एक मूर्ति कम बना पाया।
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प्राकृतिक झरने: यहाँ पहाड़ियों के बीच से बहने वाले प्राकृतिक झरने और नदियाँ मूर्तियों के सौंदर्य को और बढ़ा देती हैं।
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पूर्वोत्तर का अनोखा तीर्थ: यह स्थान पूर्वोत्तर भारत में शैव परंपरा (Shaivism) का सबसे बड़ा और प्राचीन केंद्र माना जाता है।
यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज की संभावना (UNESCO World Heritage Site Status)
अपनी अद्भुत सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्ता के कारण Unakoti Tripura को UNESCO की संभावित विश्व धरोहर सूची (Tentative List of UNESCO World Heritage Sites) में शामिल किया गया है। यदि इसे पूर्ण विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है, तो यह वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर त्रिपुरा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
Unakoti Tripura केवल पत्थरों और नक्काशियों का ढेर नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन स्थापत्य कला और रहस्यों से भरी पौराणिक कथाओं का एक जीवित प्रमाण है। घने जंगलों के बीच शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव करने वाले हर यात्री को जीवन में एक बार त्रिपुरा के इस अद्भुत स्थल की यात्रा अवश्य करनी चाहिए।
Image Credit: Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

















