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Jagannath Rath Yatra 2026: पूरी कहानी, इतिहास, रहस्य, 10 रोचक तथ्य और तिथि

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By Santosh Kumar Swain

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Jagannath Rath Yatra 2026: पूरी कहानी, इतिहास, रहस्य, 10 रोचक तथ्य और तिथि
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नमस्कार मित्रों! आज हम जानेंगे उस महान पर्व के बारे में, जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु ओडिशा के पवित्र धाम ‘पुरी’ में एकत्र होते हैं। यह उत्सव है विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra), जिसे धरती का सबसे बड़ा, भव्य और सबसे पवित्र रथ उत्सव माना जाता है।

Jagannath Rath Yatra की पूरी कहानी (Mythological Story)

ओडिशा के पुरी में हर साल आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। यह एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र धार्मिक परंपरा है।

  • मौसी के घर यात्रा: इस महाउत्सव में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा अपने-अपने भव्य रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर (Gundicha Temple) जाते हैं।

  • 9 दिनों का प्रवास: भगवान श्री मंदिर से निकलकर 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर में 9 दिनों तक विश्राम करते हैं।

  • बहुड़ा यात्रा (वापसी): 9 दिनों के प्रवास के बाद भगवान अपने मुख्य मंदिर (श्री मंदिर) में वापस लौट आते हैं, जिसे बहुड़ा यात्रा (Bahuda Yatra) कहा जाता है।

Jagannath Rath Yatra क्यों मनाई जाती है? (Significance)

जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह समानता, भाईचारे और निष्काम भक्ति का अद्भुत प्रतीक है:

  • भक्तों को दर्शन: मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए स्वयं मंदिर के गर्भगृह की दीवारों से बाहर आते हैं।

  • जाति-धर्म का भेद नहीं: इस यात्रा में बिना किसी भेदभाव के सभी जातियों और धर्मों के लोग भगवान का रथ खींच सकते हैं।

  • मोक्ष की प्राप्ति: शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति रथ पर सवार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन कर लेता है, उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) मिल जाती है।

Jagannath Rath Yatra के मुख्य नियम और अनुष्ठान (Rituals)

  1. स्नान यात्रा और अनासर (एकांतवास): ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान को 108 घड़ों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है (स्नान यात्रा)। अत्यधिक स्नान के कारण भगवान बीमार (बुखार) हो जाते हैं। इसके बाद 15 दिनों तक भगवान एकांतवास (अनासर) में रहते हैं और मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।

  2. नेत्रोत्सव: 15 दिनों के इलाज के बाद भगवान स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे नेत्रोत्सव कहा जाता है।

  3. छेरा पहंरा (Chhera Pahara): रथ यात्रा शुरू होने से पहले पुरी के गजपति राजा स्वयं सोने की झाड़ू से रथ के मंडप और रास्ते की सफाई करते हैं। यह अनुष्ठान सिखाता है कि भगवान के सामने राजा और रंक सब बराबर हैं।

तीनों रथों के नाम, रंग और संरचना (3 Chariots Details)

भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के रथ हर साल पूरी तरह नए बनाए जाते हैं:

  • भगवान जगन्नाथ का रथ (नंदीघोष – Nandighosha):

    • रंग: लाल और पीला

    • पहियों की संख्या: 16 पहिए

    • ऊंचाई: लगभग 45 फीट

  • भगवान बलभद्र का रथ (तालध्वज – Taladhwaja):

    • रंग: लाल और हरा

    • पहियों की संख्या: 14 पहिए

    • ऊंचाई: लगभग 44 फीट

  • देवी सुभद्रा का रथ (दर्पदलन / देवदलन – Darpadalan):

    • रंग: लाल और काला

    • पहियों की संख्या: 12 पहिए

    • ऊंचाई: लगभग 43 फीट

Jagannath Rath Yatra के बारे में 10 रोचक तथ्य (10 Facts)

  1. हर साल बनते हैं नए रथ: तीनों देवताओं के लिए हर साल अक्षय तृतीया से नए लकड़ी के रथों का निर्माण शुरू होता है।

  2. बिना लोहे के रथ: विशाल रथों के निर्माण में किसी भी धातु या लोहे की कीलों का उपयोग नहीं होता। इन्हें केवल विशेष नीम और फाँसी की लकड़ियों तथा रस्सियों से जोड़ा जाता है।

  3. राजा करते हैं सफाई: पुरी के गजपति महाराजा सोने की झाड़ू से रथ मार्ग को बुहारते हैं (छेरा पहंरा)।

  4. भगवान का एकांतवास: स्नान यात्रा के बाद भगवान 15 दिनों तक अस्वस्थ रहकर एकांतवास (अनासर) में रहते हैं।

  5. मौसी के घर का भोग: गुंडिचा मंदिर में प्रवास के दौरान भगवान को ‘पोड़ा पीठा’ नामक विशेष मीठा व्यंजन अर्पित किया जाता है।

  6. अपूर्ण मूर्तियां: पुरी मंदिर में विराजित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी की काष्ठ मूर्तियां अधूरी (अपूर्ण) हैं। मान्यता है कि मूर्तिकार (विश्वकर्मा) के शर्त टूटने पर वे बीच में ही निर्माण छोड़ गए थे।

  7. ध्वज बदलने की परंपरा: पुरी मंदिर के 45 मंजिल ऊंचे शिखर पर प्रतिदिन नंगे हाथों उल्टी दिशा में चढ़कर ध्वज (पताका) बदला जाता है। यह परंपरा 800 से अधिक वर्षों से अनवरत जारी है।

  8. अंतर्राष्ट्रीय ख्याति: पुरी के अलावा न्यूयॉर्क, लंदन, पेरिस और मॉस्को जैसे दुनिया के कई प्रमुख शहरों में इस्कॉन (ISKCON) द्वारा भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है।

  9. समुद्र की लहरों की आवाज: मंदिर के सिंहद्वार के अंदर पहला कदम रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देना बंद हो जाती है।

  10. संसार की सबसे बड़ी रथ यात्रा: पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया का सबसे बड़ा और विशाल रथ उत्सव माना जाता है।

वर्ष 2026 में Jagannath Rath Yatra कब है? (Rath Yatra Date)

वर्ष 2026 में विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 (दिन: गुरुवार) को निकाली जाएगी।

  • रथ यात्रा प्रारंभ (गुंडिचा यात्रा): 16 जुलाई 2026

  • बहुड़ा यात्रा (वापसी): 24 जुलाई 2026

  • सुना बेश (Suna Besha): 25 जुलाई 2026

  • नीलाद्रि बीजे (Niladri Bije): 27 जुलाई 2026

हिन्दू पंचांग के अनुसार यह भव्य रथ यात्रा हर साल आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को शुरू होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम, समर्पण और सामाजिक समानता का महापर्व है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिव्य रथ यात्रा खींचकर स्वयं को धन्य मानते हैं। यदि आपको कभी अवसर मिले, तो जीवन में एक बार पुरी धाम जाकर इस अलौकिक रथ यात्रा का अनुभव अवश्य करें।

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संतोष कुमार स्वैन एक ओड़िया लेखक (Odia Writer), डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और ट्रैवल ब्लॉगर हैं। वे वर्ष 2009 से ऑनलाइन सक्रिय हैं और 2010 से विभिन्न वेबसाइटों के माध्यम से उपयोगी जानकारी साझा कर रहे हैं। 2017 से वे YouTube पर भी सक्रिय हैं, जहाँ वे अलग-अलग विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट प्रकाशित करते हैं। वर्तमान में वे TourismPlace.co.in के संस्थापक और संपादक हैं तथा भारत के पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थानों, ऐतिहासिक धरोहरों और यात्रा गाइड से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी सरल हिंदी में पाठकों तक पहुँचाते हैं।

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