नमस्कार मित्रों,
आज़ हम जानेंगे उस महोत्सव के बारे में जो की जिसे देखने के लिए दुनिया भर से (लाखों करोड़ों) लोग ओडिशा से पूरी धाम में इकट्ठा होते हैं जो कि कैवल (यात्रा) करने के लिए और ऐसे ही कहलाता है (Jagannath Rath Yatra) धरती का सबसे बड़ा अथवा सबसे विशाल और सबसे पवित्र माना जाता है।
Jagannath Rath Yatra की पुरी कहानी क्या है?
ओडिशा के पुरी में हर साल की तरह ही आषाढ़ द्वितीया को निकालीं जाने वाली (भगवान रथ यात्रा) Jagannath Rath Yatra एक ऐसी प्राचीन धार्मिक परम्परा होती है। इस महाउत्सव में भगवान जगन्नाथ उनके (भाई बलभद्र) और बहन सुभद्रा रथों में सवार होकर अपनी मौसी के घर में (गुडिचा मंदिर) जाते हैं।यह यात्रा याद गार होने के साथ ही पूरी दुनिया में अपनी भव्यता और धार्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध है।
Jagannath Rath Yatra क्यों मनाई जाती है?
Jagannath Rath Yatra हर साल ओडिशा के पुरी में (भगवान जगन्नाथ) उनके बड़े भाई बलभद्र और उनकी छोटी बहन सुभद्रा की ।।।ववो।ध यात्रा की याद में मनायी जातीं हैं। यह भव्य आयोजन सभी (जातियों और धर्मों) के लोगों के लोगो के अन्तर गत या बीच समानता,(भाईचारे) का प्रतीक है और यह दर्शाता है जो की ईश्वर अपने भक्तों को दर्शन कराने यह देने के लिए मन्दिर की दीवारों से बाहर आ जाता है।
Jagannath Rath Yatra का रहस्य क्या है?
ओडिशा के पुरी में हर साल (आषाढ़ महीनों में) निकलने वाली (Jagannath Rath Yatra) के कई रहस्य तथा चमत्कार हैं। सबसे बड़े रहस्य यह है कि हर साल भगवान जगन्नाथ (बलभद्रा तथा देवी सुभद्रा) के रथों पर जिसमें (लोहा या धातु की एक भी कील नहीं होती) है। का निर्माण अक्षय तृतीया से बिल्कुल नया सीरा से शुरू होता है।
Jagannath Rath Yatra कितने दिनों के लिए होती है?
एक अन्य अनुष्ठान के अनुसार ( जब पहाड़ी विजय में देवताओं) श्री मंदिर से रथों पर लें जाते हैं रथ यात्रा में तीनों देवताओं को जगन्नाथ मंदिर से होकर रथों पर सवार होकर गुड़िया मंदिर लें जाता है , जहां पर वे ( नौ दिनों तक रहते) हैं।
रथ यात्रा के बारे में 10 रोचक तथ्य क्या है?
1) हर साल बनते हैं नए रथ: भगवान जगन्नाथ बलभद्र (बलराम) तथा देवी सुभद्रा के लिए हर साल लकड़ी के नए रथ बनाए जाते हैं।जिनका निर्माण अक्षय तृतीया से शुरू होता है।
2) बिना लोहे के रथ: इन विशाल रथों को बनने के लिए किसी भी धातु या लोहे की कीलों को इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इन्हें केवल विशेष तरह की नीम और हांसी (फांसी) की लकड़ियों से जोड़ा जाता है।
3)राजा करतें हैं सड़क की सफाई: रथ यात्रा शुरू होने से पहले ही पुरी के गजपति राजा सोने की झाड़ू से रथ को रास्ते और मंडप को साफ़ करते हैं।यह इस बात का प्रतीक कहलाता है कि ईश्वर के सामने राजा और रंक सब बराबर हैं
4) भगवान को आता है बुखार: ज्येष्ठ पूर्णिमा (स्नान यात्रा)पर 108 घड़ों के जल से स्नान करने के कारण भगवान को 15 दिनों तक बुखार रहता है। इस दौरान वे एकांतवास में रहने लगे थे और उनके कपाट बंद रहने लगे थे।
5) मौसी के घर की यात्रा: नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में (तीन भाई,बहन अपने मौसी के घर,( गुड़िया मंदिर) जाते हैं और वहां 7 दिनों तक विश्राम अथवा आराम करते हैं। वापसी की यात्रा बहुदा यात्रा कहलाती है।
6) रथों के रंग और पहिए: भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष (लाल, पीला ,16 पहिए बलभद्र का रथ तालधवज) (लाल,हरा 14 पहिए) तथा सुभद्रा का दर्प दलन (लाल,काला,12 पहिए) का होता है।
7) मोक्ष का मार्ग: धार्मिक मान्यता है कि रथे च वमन दूसरा पुनर जन्म न विद्यते, यानी जो व्यक्ति रथ पर सवार भगवन जगन्नाथ के दर्शन कर सकता हैं। उसे पुनर्जन्म में मुक्ति मिल सकती है।
8) भगवान को विशेष भोग: मौसी के घर (गुड़िया मंदिर में) भगवान को पोडा पीठा नामक एक विशेष प्रकार का (मीठा पैन केक ) पकवान अर्पित किया जाता है।
9) अपूर्ण मूर्तियां: पुरी मंदिर में मौजूद भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां सदियों यह सालों से अपूर्ण (अधूरी) ही पूजी जाती है। मान्यता है की मूर्तिकार (विश्वकर्मा) के बीच में ही काम छोड़कर ग़ायब हो गए थे।
10) अंतराष्ट्रीय मान्यता: इस भव्य रथ यात्रा का प्रभाव इतना कठिन है। कि भारत के अलावा ( न्यूयॉर्क, लंदन पेरिस और मास्को जैसे दुनिया के कोई प्रमुख शहरों में भी इस्कान (Iskcon) द्वारा भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है।
विश्व की सबसे बड़ी रथ यात्रा कौन सी है?
विश्व की सबसे बड़ी रथ यात्रा होती है। जो की (ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर की रथ यात्रा) मानी जाती है। यह न केवल भारत में है बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा विशाल रथ उत्सव कहलाता है। जिससे भगवान जगन्नाथ और उनके बड़े भाई बलभद्र तथा उनकी बहन सुभद्रा के लिए हर साल नए लकड़ी के विशाल रथ बनाया जाता है। और लाखों श्रद्धालु इन्हें खींचते हुए ले जाते हैं।
नंगें हाथों इस झंडे को बदलने के लिए चढ़ाई चढ़ते है,, यह तक परंपरा पिछले (800) सालों से लगातार निभाई जाती है जो की बहुत जरुरी होता है।
2026 में Jagannath Rath Yatra कब निकलेगी?
(वर्ष 2026) में विश्र प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा (16 जुलाई,दिन गुरुवार से शुरू होगी) हिन्दू धर्म के अनुसार यह भव्य रथ यात्रा हर साल (आषाढ़ माह) में शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को निकालीं जातीं हैं। और हमेशा की तरह इस साल 2026 में भी यह जगन्नाथ रथ यात्रा याद गार होंगी।
इस पवित्र यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ और उनके बड़े भाई बलभद्र (बलराम) तथा उनकी बहन सुभद्रा अपने अपने भव्य रथों पर सवार होकर मुख मंदिर से कुछ दूर लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अपनी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर जाते हैं हमेशा की तरह ही नौ दिनों के बाद,तीनो देवता(24 जुलाई) को बहुदा यात्रा को पुरा करके वह वापस अपने मुख्य मंदिर में लौट आयें थे।
निष्कर्ष
Jagannath Rath Yatra केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, समानता, सेवा और भक्ति का महान पर्व है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस दिव्य यात्रा के दर्शन करके स्वयं को धन्य मानते हैं। यदि आपको कभी अवसर मिले, तो जीवन में एक बार अवश्य पुरी जाकर इस भव्य रथ यात्रा का अनुभव करें। अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें हमारी दूसरी पोस्ट भी ज़रूरी हैं
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