Jagannath Mandir के 10 रहस्य क्या हैं? जानिए इन रहस्यों के पीछे की पूरी कहानी

नमस्भाकार मित्ररो आजकी इस आर्तटिकल हम आपको बतान्येंगे Jagannath Mandir के 10 रहस्य क्या हैं? में एक जगह है जहाँ साइंस खामोश हो जाती है जहाँ हवाएं अपना रास्ता भूल जाती है। जहाँ एक झंडा पूरी दुनिया की फिजिक्स को हर रोज़ चुनौती देता है, ये कोई फैंटसी नहीं, ये कोई मिथ नहीं। ये जगन्नाथ मंदिर है पुरी।

ओडिशा 1200 साल पुरानी दीवारों के पीछे आज भी कुछ ऐसा छुपा है, जिसे ना साइंस एक्सप्लेन कर पाई ना किसी गवर्मेंट ने ऑफिशियली एक्सेप्ट किया। आज हम आपको 10 दरवाजों तक ले जाएंगे। 10 रहस्य, 10 सवाल और शायद एक ऐसा सच?

जो आपको अंदर तक खिला दे।

समुद्र की आवाज कहां गायब हो जाती है

सोचिए आप पूरी बीच पर खड़े हैं समुद्र की गर्जना आपके कानों में भर रही है, लहरों की आवाज इतनी तेज की आप अपनी ही बात नहीं सुन सकते। अब आप सिंह द्वार में कदम रखते हैं मंदिर का पहला दरवाजा।

और खामोशी पूरी तरह एक पल पहले जो समुद्र दहाड़ रहा था, अब सुनाई ही नहीं देता। साइंटिस्ट्स ने कहा है, इंजीनियर ने कहा, आर्किटेक्चर का कमाल है, लेकिन 1200 साल पहले जब ये मंदिर बना था।

क्या तब भी कोई अकॉस्टिक इंजीनियर था? ये पहला सवाल था लेकिन यहाँ रहस्य सिर्फ शुरू हुआ था।

Jagannath Mandir का ध्वज उल्टा क्यों लहराता है?

दिन हो या तूफानी रात, समुद्र के किनारे हवा हमेशा एक तय दिशा में चलती है। ये साइंस है नेचर का नियम।

लेकिन जगन्नाथ टेम्पल के शिखर पर लगा झंडा मानो इन नियमों को चुनौती देता है। कहा जाता है की मंदिर की पताका अक्सर हवा के उलटे डायरेक्शन में लहराती दिखाई देती है। सालों से लोग इसे देख रहे हैं। कई रिसर्चर्स और एक्सपर्ट्स ने इसके पीछे की वजह समझने की कोशिश की।

कुछ का मानना है की मंदिर की विशाल स्ट्रक्चर और उसकी उचाई हवा के फ्लो को बदल देती है। लेकिन आज भी कोई ऐसा जवाब नहीं मिला जो हर सवाल को पूरी तरह शांत कर सके। और असली रहस्य सिर्फ झंडा नहीं है हर शाम।

करीब 200 फिट ऊंचे शिखर पर एक पुजारी बिना किसी मॉडर्न सेफ्टी इक्विपमेंट के सीधे चढ़ता है। सिर्फ इसलिए ताकि मंदिर का झंडा बदला जा सके, क्योंकि मान्यता है की अगर एक भी दिन ये झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर अगले 18 सालों तक बंद हो जाएगा। सोचिए।

1200 साल पहले जब ना वेधर साइंस थी, ना मॉडर्न इंजीनियरिंग तब इस मंदिर को बनाने वाले लोग क्या सच में कुछ ऐसा जानते थे जिसे आज की दुनिया अब तक पूरी तरह समझ नहीं पाई?

Jagannath Mandir के ऊपर पक्षी क्यों नहीं उड़ते हैं?

पूरी में पक्षी है हजारों। कबूतर, चील, तोता वो मंदिर के आसपास आते हैं, उसके पास तक भी आते हैं, लेकिन मंदिर के शिखर के ऊपर एक भी पक्षी नहीं कभी नहीं और ये सिर्फ पक्षियों की बात नहीं।

इंडियन गवर्मेंट ने ओमफसिअलै पुरी के ऊपर एक नो फ्लाइ ज़ोन डिकलेर कर रखा है। कोई भी एयरक्रॉफ्ट मिलट्री हो या सिविलियन मंदिर के सीधा ओपर से नहीं गुजर सकता। अब आप पूछेंगे ये तो गवर्मेंट का रूल होगा। हाँ लेकिन रूल बनाने से पहले?

कुछ डकेड्स पहले पाइलोट्स ने रिपोर्ट किया था की जब भी वो इस एरिया के ऊपर से गुजरते थे उनके इंस्ट्रुमेंट्स काम करना बंद कर देते थे। वो लोग वापस आए, उन्होंने अपनी रिपोर्ट लिखी और तब गवर्मेंट ने वो ज़ोन बंद कर दिया। परमानेंटली कुछ चीजें होती हैं, जिन्हें एक्सप्लेन नहीं किया जाता। सीधा बंद कर दिया जाता है।

Jagannath Mandir का प्रसाद कैसे बनता है?

Jagannath Mandir में प्रसाद बनाने का एक तरीका है जो सिर्फ यहाँ होता है। सात मिट्टी के बर्तन एक के ऊपर एक रख दिए जाते हैं। नीचे से आग लगाई जाती है।

अब आप सोचिए, फिजिक्स क्या कहती है? नीचे वाला बर्तन पहले गर्म होगा। नीचे वाला पहले पकेगा। ये बेसिक हीट ट्रांसफर है, लेकिन जगन्नाथ मंदिर की रसोई में लोग एक अलग ही नजारा देखते हैं। कहा जाता है की सबसे ऊपर वाला बर्तन पहले पक जाता है।

ऊपर वाला पहले नीचे वाला बाद में आखिर ऐसा क्यों होता है? साइंटिस्ट्स और रिसर्चर्स ने इस कुकिंग मेथड को समझने की कोशिश की। कुछ ने कहा, ये स्टीम कन्वेक्शन है। कुछ ने कहा रसोई की पारंपरिक बनावट, लेकिन आज भी इसका एग्ज़ैक्ट रीज़न आप पूरी तरह क्लियर नहीं है।

1200 साल पुरानी इस रसोई में आज भी वही परंपरा चल रही है और हर दिन हजारों लोगों के लिए महाप्रसाद तैयार होता है। साइंस इसे एक्सप्लेन करने की कोशिश करती है। लेकिन श्रद्धा और रहस्य आज भी वैसे ही कायम है।

Jagannath Mandir में कभी महाप्रसाद कम क्‍यों नहीं पड़ती

Jagannath Mandir की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी मंदिर रसोईयों में से एक मानी जाती है। यहाँ रोज़ 500 से अधिक रसोई ये काम करते हैं। 56 प्रकार का भोग बनाया जाता है और ये प्रसाद।

सिर्फ 2000 लोगों के लिए नहीं बनता, सिर्फ 20,000 के लिए भी नहीं। कभी कभी एक ही दिन में 1,00,000 लोग आते हैं और प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता। सोचिए एक रसोई एक ही दिन में 50,000 लोग आये प्रसाद पूरा अगले दिन 1,00,000 लोग आये।

प्रसाद फिर भी पूरा और अगर कोई नहीं आया तो बचा हुआ प्रसाद उस दिन बिलकुल सही मात्रा में होगा। ना ज्यादा, ना कम मंदिर में एक पुरानी कहावत कही जाती है की माता लक्ष्मी स्वयं रसोई में उपस्थित रहती है और वही रसोईयों को संकेत देती है।

कितना भोजन बनाना है? शायद इसी वजह से 1200 सालों से महाप्रसाद कभी कम नहीं पड़ता।

जगन्नाथ जी की मूर्ति अधूरी क्यों है?

भगवान जगन्नाथ की मूर्ति अलग है, बहुत अलग, कोई हाथ नहीं, कोई पैर नहीं, बस वो विशाल आंखें।

लेकिन ये ऐसी क्यों है? इसके पीछे एक कहानी है। मालवा के राजा इंद्रद्युम्न भगवान विष्णु के परम भक्त थे। 1 दिन उन्हें पता चला की धरती पर एक रहस्यमयी दिव्य स्वरूप की पूजा होती है। नील माधव राजा ने उसे खोजने के लिए अपने दूध चारों दिशाओं में भेजे।

बहुत खोज के बाद नील माधव का रहस्य तो मिला लेकिन तब तक वह दिव्य स्वरूप अदृश्य हो चुका था। राजा व्याकुल हो गए। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की तब एक रात भगवान उनके स्वप्न में आये। उन्होंने कहा चिंता मत करो।

समुद्र तट पर एक दिव्य नियम की लकड़ी बहकर आएगी उसी पवित्र दारू से मेरा नया स्वरूप बनाना। कुछ समय बाद पुरी के समुद्र तट पर सचमुच एक अद्भुत नियम की लकड़ी मिली। उस पर शंख, चक्र, गदा।

और पद्म के दिव्य चिन्ह बने थे। राजा समझ गए ये स्वयं भगवान का संकेत है। उन्होंने उस स्थान पर एक भव्य मंदिर बनवाने का निश्चय किया। मंदिर बन कर तैयार हो गया, लेकिन अब सबसे बड़ा प्रश्न था भगवान की मूर्ति कौन बनाएगा? राजा इंद्रद्युम्न ने।

दूर दूर से श्रेष्ठ शिल्पकार बुलाये सबने कोशिश की लेकिन जैसे ही उनके ओजार उस पवित्र नियम की लकड़ी पर चलते वो काम ही नहीं करते, छेनी रुक जाती, धार कुंद पड़ जाती मानो वो लकड़ी किसी इंसान के हाथों से बनना ही नहीं चाहती थी।

कोई मूर्ति पूरी नहीं बना पाया और फिर एक बूढ़ा ब्राह्मण आया, बोला मैं बनाऊंगा लेकिन एक शर्त है 21 दिन तक कोई दरवाजा नहीं खोलेगा, अगर खोला तो काम वही छोड़ दूंगा। पहले 13 दिन अंदर से आवाजे आती रही। चौदहवें दिन खामोशी।

रानी घबरा गयी कहीं वो भूक प्यास से मर तो नहीं गया? राजा से रहा नहीं गया, दरवाजा खुलवा दिया अंदर ब्राह्मण नहीं था सिर्फ वो मूर्ति थी अधूरी बिना हाथ बिना पैर वो ब्राह्मण कौन था, कहाँ गया? लोग कहते हैं वो कोई साधारण ब्राह्मण नहीं था।

वो थे देवताओं के शिल्पकार। स्वयं भगवान के कारीगर जिन्होंने स्वर्ग बनाया, जिन्होंने देवताओं के अस्त्र बनाए वही विश्वकर्मा एक बूढ़े ब्राह्मण के रूप में उस दरवाजे के अंदर गए थे और जब दरवाजा खुला वो जा चूके थे बिना बताए बिना मिले।

जब राजा इंद्रद्युम्न ने उन अधूरी मूर्तियों को देखा तो उनका ह्रदय टूट गया। उन्हें लगा उनसे बहुत बड़ी भूल हो गई। उस रात भगवान स्वयं राजा के स्वप्न में आए। उन्होंने कहा, चिंता मत करो।

मैं इसी रूप में धरती पर रहना चाहता हूँ। मेरे इस स्वरूप में भी मैं पूर्ण हूँ। सुबह होते ही राजा ने उन्हीं मूर्तियों की स्थापना करवाई और तभी से जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की।

उसी दिव्य, अधूरी प्रतीत होने वाली मूर्तियों की पूजा होती है। 1200 साल बाद भी और उन विशाल आँखों में आज भी कुछ है जो अंदर तक छू जाता है।

Jagannath Mandir के सुदर्शन चक्र का रहस्य क्या है?

मंदिर के बिलकुल ऊपर एक सुदर्शन चक्र है। लोहे का हजारों साल पहले हाथ से बनाया गया और ये चक्र।

आप पुरी में कहीं भी खड़े हो, किसी भी डायरेक्शन से सीधा आप की तरफ मुँह किए लगता है। ईस्ट से देखो सीधा वेस्ट से देखो सीधा नॉर्थ साउथ डायग्नल हर जगह से सीधा इस फिनोमिन को नीला चक्र कहते हैं और ये सिर्फ परसेप्शन नहीं है।

सर्वर्स ने मेजर किया कैमरा से टेस्ट किया रिज़ल्ट हर बार सेम 1200 साल पहले बिना कंप्यूटर के बिना कद सॉफ्टवेयर के किसी ने कुछ ऐसा डिजाइन किया जो आज भी इंजीनियर को हैरान करता है। सवाल ये नहीं की ये कैसे बना? सवाल ये है।

की किसी को पता कैसे था की ये बनाना है

Jagannath Mandir में छुपी हुई सुरंग आखिर कहां जाता  है

1984 एक अर्चियोलॉजिकल सर्वे पुरी में कुछ रिसर्चर्स मंदिर के आस पास खुदाई कर रहे थे और उन्हें मिली एक टनल अंदर जाने की कोशिश की गई।

थोड़ी दूर तक गए, फिर बंद कर दिया गया। ऑफिशियली एएसआई आर्किओलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने रेकर्ड सेल कर दिए। पब्लिक के लिए अवलेबल नहीं, आज भी नहीं लोकल पुरोहित कहते हैं, ये टनल्स मंदिर को गुंडीचा मंदिर से जोड़तें हैं। कुछ लोग कहते हैं।

ये टनल्स और भी कई जगह जाते हैं। कहा कोई ऑफिशियली नहीं जानता या जो जानते हैं वो बता नहीं सकते। ये सिर्फ एक टनल की बात नहीं है। ये उस सवाल की बात है की 1200 साल पहले इस मंदिर को बनाने वाले।

कहाँ जाना चाहते थे और क्यों वो रास्ता आज भी छुपाया जा रहा है?

Jagannath Mandir में  नबकलेवर के दोरान क्या होता है

हर 8 साल में कभी कभी 12 साल में जगन्नाथ मंदिर में एक ऐसा रिच्युअल होता है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते है। इसका नाम है।

भगवान का नया शरीर पुराना शरीर बदला जाता है। नियम की एक खास लकड़ी से नया विग्रह बनाया जाता है और फिर एक चीज़ है जो पुराने विग्रह के अंदर होती है जो नए विग्रह में डाली जाती है। पुरोहित

आँखों पर पट्टी बांधकर हाथ में काला कपड़ा पहनकर उस चीज़ को ट्रांसफर करते हैं सिर्फ स्पर्श से सिर्फ फील करके और जो पुरोहित ये करते हैं वो कहते हैं की उस वक्त उन्हें कुछ ऐसा फील होता है जो वर्ड्स में नहीं कह सकते। कुछ लोग बेहोश हो जाते हैं।

कुछ लोग रो देते हैं। कुछ लोग फिर कभी नॉर्मल नहीं रहते। वो चीज़ क्या है? उसका नाम है ब्रह्म पदार्थ।

जगन्नाथ का ब्रह्म पदार्थ क्या है?

ये इस डॉक्यूमेंट्री का सबसे बड़ा सवाल है। ब्रह्म पदार्थ कोई नहीं जानता, ये असल में क्या है?

ना गवर्मेंट, ना साइंस, ना कोई आउटसाइडर। कुछ लोग कहते हैं ये एक लिविंग ऑर्गनाइज्म है। आज भी हजारों सालों बाद भी कुछ लोग कहते हैं। ये एक डिवन एनर्जी है जो फॉर्म नहीं ले सकती। इसी लिए सिर्फ ट्रांसफर होती है और कुछ लोग जो इस रिचुअल में रहे हैं।

उनका कहना है, जब हम उस चीज़ के पास आए, हमें लगा कोई सांस ले रहा है। एक मूर्ति जो टेक्निकली सिर्फ लकड़ी से बनी है और फिर भी अंदर कुछ है जो जिंदा लगता है। 1200 साल हजारों और आज तक।

किसी ने ये नहीं जाना की उस मूर्ति के अंदर असल में क्या है ये

निष्कर्ष

10 रहस्य 10 अलग सवाल नहीं है ये एक ही बात कह रहे हैं की कुछ चीजें इंसान की समझ से परे है की कुछ सच साइंस की भाषा में नहीं लिखे जाते की कुछ सवालों का जवाब। सिर्फ फील किया जा सकता है। जगन्नाथ मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं है। ये एक लिविंग मिस्ट्री है जो रोज़ सुबह अपना दरवाजा खोलती है और रोज़ रात कुछ और छुपा कर बंद हो जाती है। शायद कुछ रहस्य रहस्य ही रहने चाहिए क्योंकि जीस दिन हम सब जाएंगे उस।

उस दिन वंडर खत्म हो जाएगा और वंडर के बिना इंसान सिर्फ एक मशीन है। जगन्नाथ जगत के नाथ दुनिया के स्वामी उनसे कुछ छुपता नहीं लेकिन हमसे बहुत कुछ छुपाया जाता है क्यों? शायद ये जानने के लिए।

आपको एक बार पूरी जाना पड़ेगा और सिंह द्वार में कदम रखना पड़ेगा।

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